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प्रश्न 1 कथन – I : चन्द वंश के शासनकाल में ‘खालसा भूमि’ सीधे राज्य के नियंत्रण में रहती थी। कथन – II : खालसा भूमि से प्राप्त आय का उपयोग राज्य की सैन्य आवश्यकताओं में किया जाता था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (A) केवल कथन I (B) केवल कथन II (C) दोनों कथन I और II (D) न तो कथन I और न तो कथन II ✅ सही उत्तर : (C) दोनों कथन I और II व्याख्या : चन्द शासकों के काल में भूमि को विभिन्न श्रेणियों में बाँटा गया था। खालसा भूमि वह भूमि होती थी जिस पर सीधे राजा का अधिकार होता था और उससे प्राप्त राजस्व राज्य को मिलता था। इस आय का उपयोग मुख्यतः सेना के भरण-पोषण, किलों के निर्माण और प्रशासनिक खर्चों में किया जाता था। अतः दोनों कथन ऐतिहासिक रूप से सही हैं। प्रश्न 2 कथन – I : गोरखा काल में ‘बेगार प्रथा’ को व्यवस्थित रूप दिया गया। कथन – II : बेगार प्रथा के अंतर्गत जनता से बिना पारिश्रमिक श्रम लिया जाता था। (A) केवल कथन I (B) केवल कथन II (C) दोनों कथन I और II (D) न तो कथन I और न तो कथन II ✅ सही उत्तर : (C) दोनों कथन I और II व्याख्या : गोरखा शासन (1790–1815) में पहले से प्रचलित बेगार...

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1. भागीरथी नदी में गंगोत्री के निकट मिलने वाली सहायक नदी का नाम क्या है? (a) केदार गंगा (b) जाड़ गंगा (c) बिरही गंगा (d) सप्त गंगा 👉 उत्तर: (b) जाड़ गंगा 2. अलकनन्दा नदी में विष्णुप्रयाग पर कौन-सी नदी मिलती है? (a) नन्दाकिनी (b) धौलीगंगा (c) पिण्डर (d) मन्दाकिनी 👉 उत्तर: (b) धौलीगंगा 3. नन्दप्रयाग पर अलकनन्दा नदी में कौन-सी सहायक नदी मिलती है? (a) मन्दाकिनी (b) पिण्डर (c) नन्दाकिनी (d) जाड़ गंगा 👉 उत्तर: (c) नन्दाकिनी 4. कर्णप्रयाग पर अलकनन्दा में मिलने वाली नदी कौन-सी है? (a) मन्दाकिनी (b) पिण्डर (c) धौलीगंगा (d) टौंस 👉 उत्तर: (b) पिण्डर 5. रुद्रप्रयाग पर किन दो नदियों का संगम होता है? (a) अलकनन्दा–धौलीगंगा (b) भागीरथी–अलकनन्दा (c) अलकनन्दा–मन्दाकिनी (d) मन्दाकिनी–पिण्डर 👉 उत्तर: (c) अलकनन्दा–मन्दाकिनी 6. देवप्रयाग पर गंगा का निर्माण किन दो नदियों के संगम से होता है? (a) भागीरथी–मन्दाकिनी (b) अलकनन्दा–धौलीगंगा (c) भागीरथी–अलकनन्दा (d) जाड़ गंगा–भागीरथी 👉 उत्तर: (c) भागीरथी–अलकनन्दा 7. मन्दाकिनी नदी किस प्रयाग पर अलकनन्दा में मिलती है? (a) नन्दप्रयाग (b) कर्णप्रयाग (c) रुद्...

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1. निम्नलिखित में से कौन सा घाटी नगर (Valley Town) का उदाहरण है? (a) मसूरी (b) नैनीताल (c) श्रीनगर (d) लैंसडौन 👉 उत्तर: (c) श्रीनगर 2. निम्नलिखित में से कौन सा नगर पर्वतीय ढाल (Hill Slope Town) पर विकसित हुआ है? (a) देहरादून (b) हल्द्वानी (c) अल्मोड़ा (d) ऋषिकेश 👉 उत्तर: (c) अल्मोड़ा 3. उत्तराखण्ड का कौन सा नगर झील नगरी (Lake Town) के रूप में प्रसिद्ध है? (a) मसूरी (b) नैनीताल (c) पौड़ी (d) टिहरी 👉 उत्तर: (b) नैनीताल 4. निम्नलिखित में से कौन सा छावनी नगर (Cantonment Town) है? (a) श्रीनगर (b) लैंसडौन (c) रुद्रपुर (d) काशीपुर 👉 उत्तर: (b) लैंसडौन 5. देहरादून घाटी किस दो पर्वत श्रेणियों के बीच स्थित है? (a) शिवालिक–हिमाद्रि (b) हिमाद्रि–हिमाचल (c) शिवालिक–हिमाचल (d) कैलाश–नन्दा देवी 👉 उत्तर: (c) शिवालिक–हिमाचल 6. निम्नलिखित में से कौन सा नगर गंगा नदी के किनारे बसा हुआ है? (a) नैनीताल (b) मसूरी (c) श्रीनगर (d) अल्मोड़ा 👉 उत्तर: (c) श्रीनगर 7. उत्तराखण्ड का कौन सा नगर ‘प्रवेश द्वार’ (Gateway City) के रूप में जाना जाता है? (a) देहरादून (b) हरिद्वार (c) पौड़ी (d) चम्पावत 👉 उत्तर:...

राज्य में पर्यावरण से जुड़े प्रमुख व्यक्ति : MCQ प्रश्नोत्तरी

उत्तराखंड में पर्यावरण से जुड़े प्रमुख व्यक्ति : MCQ प्रश्नोत्तरी UKPSC | UKSSSC | Patwari | Forest Guard | RO-ARO के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न 1. ‘चिपको वूमन’ के नाम से किसे जाना जाता है? A. बौणी देवी B. गौरा देवी C. वन्दना शिवा D. मीरा बहन उत्तर देखें सही उत्तर: B. गौरा देवी व्याख्या: गौरा देवी ने 26 मार्च 1974 को रैणी गांव से चिपको आंदोलन की शुरुआत की। प्रश्न 2. चिपको आंदोलन की मातृ संस्था कौन-सी है? A. पर्वतीय जनजीवन मंडल B. दशौली ग्राम स्वराज्य मंडल C. नवधान्य D. HESCO उत्तर देखें सही उत्तर: B. दशौली ग्राम स्वराज्य मंडल व्याख्या: इसकी स्थापना चण्डी प्रसाद भट्ट ने 1964 में की। प्रश्न 3. ‘हिमालय में महात्मा गांधी का सिपाही’ किसे कहा जाता है? A. गुरु दास अग्रवाल B. सुन्दरलाल बहुगुणा C. धूम सिंह नेगी D. अवधेश कौशल उत्तर देखें सही उत्तर: B. सुन्दरलाल बहुगुणा प्रश्न 4. ‘Staying Alive’ पुस्तक किसने लिखी? A. अरुंधति राय B. वन्दना शिवा C. गौरा देवी D. मीरा बहन उत्तर देखें सही उत्तर: B. वन्दना शिवा प्रश्न 5. ‘जंगली’ उपनाम किस पर्यावरण...

उत्तराखंड की प्रमुख लोक देवियाँ

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चम्पी/चम्पावतीदेवी: चम्पावत के पुरातन शासकों के द्वारा अपनी कुलदेवी/इष्टदेवी के रूप में पूजित चम्पादेवी का देवालय चम्पावत के मुख्यालय में वहां के प्रसिद्ध देवालय बालेश्वर के पीछे स्थित है। झूमादेवी : स्थानीय लोगों द्वारा इष्टदेवी के रूप में पूजित झूमादेवी का देवस्थल चम्पावत जनपद में लोहाघाट से 4-5 किमी० ऊपर की ओर एक पहाड़ी पर स्थित है। हिंगला : हिडिम्बा के हिंगोले (झूले) से सम्बन्ध वहां के लोगों के द्वारा पूजित यह देवस्थल चम्पावत मुख्यालय से 4 कि०मी० में वनाच्छादित पहाड़ी के शिखर पर स्थित है। खिलपतिदेवी: खिलपतिदेवी के नाम से स्थानीय लोगों द्वारा पूजित अखिलतारिणीदेवी का यह देवस्थल चम्पावत मुख्यालय से 12-13 कि०मी० उत्तर में खिलपति नामक स्थान में स्थापित है। कोटवीदेवी : यह चम्पावत के मुख्यालय से उत्तर-पश्चिम में स्थित सुंई-बिसुंग के लोगों की इष्टदेवी का स्थान कोटालगढ़ है। यहां के पुरातन शासक असुरराज वाणासुर की माता के रूप में इसकी मान्यता के कारण इसका सम्बन्ध आर्येत्तर वर्गीय देवियों से बनता है। हिडिम्बा हिडिम्ब राक्षस की बहिन होने से हिडिम्बादेवी का सम्बन्ध आयेंत्तर जाति राक्...

उत्तराखंड के प्रमुख देवी मंदिर..

चम्पी/चम्पावतीदेवी : चम्पावत के पुरातन शासकों के द्वारा अपनी कुलदेवी/इष्टदेवी के रूप में पूजित चम्पादेवी का देवालय चम्पावत के मुख्यालय में वहां के प्रसिद्ध देवालय बालेश्वर के पीछे स्थित है। झूमादेवी : स्थानीय लोगों द्वारा इष्टदेवी के रूप में पूजित झूमादेवी का देवस्थल चम्पावत जनपद में लोहाघाट से 4-5 किमी० ऊपर की और एक पहाड़ी पर स्थित है। हिंगला : हिडिम्बा के हिंगोले (झूले) से सम्बन्ध वहां के लोगों के द्वारा पूजित यह देवस्थल चम्पावत मुख्यालय से 4 कि०मी० में वनाच्छादित पहाड़ी के शिखर पर स्थित है। खिलपतिदेवी :  खिलपतिदेवी के नाम से स्थानीय लोगों द्वारा पूजित अखिलतारिणीदेवी का यह देवस्थल चम्पावत मुख्यालय से 12-13 कि०मी० उत्तर में खिलपति नामक स्थान में स्थापित है। कोटवीदेवी : यह चम्पावत के मुख्यालय से उत्तर-पश्चिम में स्थित सुंई-बिसुंग के लोगों की इष्टदेवी का स्थान कोटा लगढ़ है। यहां के पुरातन शासक असुरराज वाणासुर की माता के रूप में इसकी मान्यता के कारण इसका सम्बन्ध आर्येत्तर वर्गीय देवियों से बनता है। हिडिम्बा : हिडिम्ब राक्षस की बहिन होने से हिडिम्बादेवी का सम्बन्ध आर्येत्तर जाति राक्ष...

उत्तराखण्ड के राजनीतिक मंच पर रानियों की भूमिका

1. रानी श्रृंगारमंजरी- उत्तराखण्ड के मध्यकालीन राजनीतिक रंगमंच पर दृष्टिपात करने पर जहां एक ओर गढ़राज्य में अनेक रानियों की सक्रिय भूमिका के उदाहरण मिलते हैं वहां कूर्माचल राज्य में उनकी भूमिका नगण्य रही है। चन्दों के 7-8 वर्षों के इतिहास में राजा दीपचन्द (1748-1777 ई.) की रानी श्रृंगारमंजरी को छोड़कर अन्य किसी का नामोल्लेख तक नहीं मिलता। कोई नहीं जानता कि चन्दवंश के शक्तिशाली गिने जाने वाले शासकों रुद्रचन्द, बाजबहादुरचन्द आदि नरेशों की रानियों का नाम क्या था? यहां की राजनीति तथा प्रशासन में हस्तक्षेप करने वाली अपवादात्मक रानी श्रृंगारमंजरी के विषय में कहा जाता है कि राजा दीपचन्द के जीवनकाल में ही उसकी अनाम पटरानी की मृत्यु हो जाने तथा इधर राज्य के कर्णधार शिवदेव जोशी के मारे जाने पर महत्वाकांक्षी रानी श्रृंगारमंजरी ने प्रशासन पर अपनी पकड़ बनाने के लिए स्वयं को चन्द शासन की वजीर तथा बख्शी घोषित कर दिया तथा अपने नवजात पुत्र क नाम पर शासनादेश जारी करने प्रारंभ कर दिये। वह राज्य की देखभाल के लिए शिवदेव जोशी द्वारा पहले से नियुक्त उसके पुत्र जयकृष्ण जोशी के कामकाज में भी हस्तक्षेप करने लग...